युवाओं में में गुर्दे की पथरी के मामलों में वृद्धि का क्या कारण हैं?

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युवाओं में में गुर्दे की पथरी के मामलों में वृद्धि का क्या कारण हैं?

 

युवावस्था में गुर्दे की पथरी: क्यों होती है?

 

परिचय  :


गुर्दे की पथरी, जिसे कभी वयस्कों को प्रभावित करने वाली स्थिति माना जाता था, आज भारत के युवा वर्ग में तेजी से फैल रहा हैं। किडनी के भीतर ये छोटी, परन्तु बेहद दर्दनाक संरचनाएं दैनिक जीवन को बाधित कर सकती हैं और इलाज न किए जाने पर गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का कारण बन सकती हैं। यह समझना महत्वपूर्ण हैं कि गुर्दे की पथरी क्या हैं, वे क्यों होती हैं, और उन्हें कैसे रोका जाए, विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए।


आइए गुर्दे की पथरी को समझें  :


गुर्दे की पथरी ठोस क्रिस्टलीय समूह हैं जो गुर्दे में तब बनती हैं जब मूत्र में कैल्शियम, ऑक्सालेट, और यूरिक एसिड जैसे पदार्थों का असंतुलन होता हैं। ये पदार्थ एक साथ जुड़ सकते हैं और छोटे दानों से लेकर बड़ी संरचनाओं तक विभिन्न आकार के पत्थर बना सकते हैं।


सीधे शब्दों में कहें तो गुर्दे की पथरी आपके मूत्र तंत्र के मार्ग में अप्रत्याशित बाधाओं की तरह हैं। वे छोटे, कठोर समूह हैं जिनका विकास तब होता हैं जब आपके मूत्र में अलग अलग खनिज एक साथ जुड़ जाते हैं। ये वैसे ही हैं जैसे की बड़े-बड़े पत्थर यातायात के सुचारू मार्ग को बाधित करते हैं। जिस प्रकार सड़क अवरोध यात्रियों के लिए देरी और निराशा का कारण बनता हैं ठीक उसी प्रकार गुर्दे की पथरी आपके मूत्र पथ के माध्यम से यात्रा करते समय तीव्र दर्द और परेशानी का सबब बन सकते हैं।  गुर्दे की पथरी का रोकथाम और उपचार बिलकुल सड़क के रखरखाव की तरह हैं, जो रास्ते को साफ रखने और बिना किसी अप्रत्याशित व्यवधान के सुचारू यात्रा सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी हैं।


गुर्दे की पथरी के कारण  :

गुर्दे की पथरी के निर्माण में कई कारक योगदान करते हैं। युवाओं में निम्नलिखित आम ट्रिगर हैं
आहार संबंधी कारण :


1.अत्यधिक नमकीन, मीठा, या प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और अपर्याप्त फल और सब्जियों का सेवन।
2.पालक, नट्स, और चॉकलेट जैसे ऑक्सालेट से भरपूर खाद्य पदार्थ का सेवन पथरी का कारण बन सकता हैं।
3.नमकीन स्नैक्स और फास्ट फूड के अत्यधिक सेवन से मूत्र में सोडियम  स्तर बढ़ जाता हैं जिससे पथरी की संभावना बढ़ जाती हैं।


जीवनशैली :
1.अत्यधिक कैफीन या सोडा के सेवन से डिहाइड्रेशन हो सकता हैं और इससे गुर्दे पर अधिक भार पड़ सकता हैं।
2.पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने से मूत्र गाढ़ा हो जाता हैं जिससे पथरी बनने का खतरा बढ़ जाता हैं।
3.गतिहीन जीवनशैली मेटाबॉलिज़्म प्रक्रियाओं में बाधा डालती हैं और गुर्दे की पथरी के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियों को बढ़ावा देती हैं।


आनुवंशिक और चिकित्सीय कारण :
1.अधिक वजन या मोटापे के कारण मेटाबोलिक असंतुलन होता हैं और गुर्दे में पथरी बनने का खतरा बढ़ जाता हैं।
2.मूत्र पथ में संक्रमण, पाचन विकार, या मेटाबॉलिज़्म संबंधी विकार जैसी  स्थितियाँ गुर्दे की पथरी के निर्माण में योगदान कर सकती हैं।
3.परिवार में गुर्दे की पथरी के इतिहास के कारण आनुवंशिक प्रवृत्ति।
4.मूत्रवर्धक और एंटासिड जैसी दवाओं का इस्तेमाल गुर्दे की पथरी के खतरे को बढ़ा सकता हैं।


कैसे युवा वर्ग गुर्दे की पथरी का शिकार होते हैं?
परंपरागत रूप से वयस्कों को प्रभावित करने वाली स्थिति मानी जाने वाली गुर्दे की पथरी भारत के युवा वर्ग को तेजी से प्रभावित कर रही हैं। यह प्रवृत्ति युवा वर्ग में प्रचलित विभिन्न जीवनशैली के कारण हैं। खराब आहार संबंधी आदतें, गतिहीन जीवन शैली, उच्च तनाव स्तर, और जंक फूड का अधिक सेवन युवाओं में गुर्दे की पथरी की बढ़ती घटनाओं में योगदान करती हैं।


गुर्दे की पथरी के लक्षण :


1.यदि आपको अचानक पसलियों के नीचे, पार्श्व, या पीठ में तेज दर्द का अनुभव हो, जो पेट के निचले हिस्से और कमर तक फैल जाए, तो यह गुर्दे की पथरी का संकेत हो सकता हैं।
2.दर्द की तीव्रता में उतार-चढ़ाव हो सकता हैं, तेज़ और तीव्र से लेकर मंद और पीड़ादायक तक।
3.दर्द के साथ-साथ मतली और उल्टी गुर्दे की पथरी से जुड़े सामान्य लक्षण हैं।
4.मूत्र में रक्त की उपस्थिति, जिसे हेमाटूरिया के नाम से जाना जाता हैं, एक और संकेत हैं जो गुर्दे की पथरी की उपस्थिति का अंदेशा दे सकता हैं।
5.बार-बार पेशाब करने की आवश्यकता महसूस होना या अचानक पेशाब करने की इच्छा महसूस होना भी गुर्दे की पथरी का लक्षण हो सकता हैं।


क्या युवा वर्ग गुर्दे की पथरी को मात दे सकते हैं?


गुर्दे की पथरी से बचाव एक स्वस्थ जीवन शैली अपनाने से शुरू होती हैं। हाइड्रेटेड रहना अत्यावश्यक हैं क्योंकि पर्याप्त पानी का सेवन मूत्र को पतला बनाए रखने में मदद करता हैं, जिससे गुर्दे में पथरी बनने का खतरा कम हो जाता हैं। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और उच्च ऑक्सालेट वाली वस्तुओं के सेवन को सीमित करते हुए फलों, सब्जियों, और साबुत अनाज से भरपूर संतुलित आहार का सेवन महत्वपूर्ण हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि न केवल समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देती हैं बल्कि गुर्दे में पथरी बनने में योगदान देने वाले मेटाबोलिक असंतुलन को रोकने में भी मदद करती हैं। नमक और चीनी का सिमित सेवन और क्रैश डाइट का वर्जन गुर्दे के स्वास्थ्य को बेहतर बना सकता हैं।


यदि गुर्दे की पथरी की समस्या हो तो…


1.यदि गुर्दे की पथरी हो जाए तो लक्षणों को कम करने और जटिलताओं को रोकने के लिए तत्काल चिकित्सकीय कार्रवाई आवश्यक हैं। ढेर सारा पानी पीकर हाइड्रेटेड रहने से पथरी को बाहर निकालने और दर्द से राहत पाने में मदद मिलती हैं।
2.कुछ खाद्य पदार्थ गुर्दे की पथरी को प्राकृतिक रूप से घुलने में मदद कर सकते हैं। इनमें नींबू और संतरे जैसे खट्टे फल शामिल हैं। इनमें  साइट्रेट होता हैं जो पथरी उत्पादन की घटनाओ को रोक सकता हैं। इसके अतिरिक्त, तरबूज़, अजवाइन, और अनार का रस उनके उच्च जल स्तर और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण गुर्दे की पथरी को तोड़ने में मदद कर सकता हैं। अपने आहार में इन खाद्य पदार्थों को शामिल करने से और पर्याप्त हाइड्रेशन बनाए रखने से गुर्दे की पथरी के प्राकृतिक विघटन और रोकथाम में सहायता मिल सकती हैं।
3.उचित उपचार विकल्पों के लिए चिकित्सीय सलाह लेना, जिसमें पथरी निकालने के लिए दवा या अन्य प्रक्रियाएँ शामिल हो सकती हैं, महत्वपूर्ण हैं। प्रभावी प्रबंधन के लिए लक्षणों की बारीकी से निगरानी करना और बिगड़ते लक्षणों या नए लक्षणों के विकास के लिए चिकित्सकीय सहायता लेना अनिवार्य हैं।


किडनी स्टोन को कभी नज़रअंदाज़ ना करें :
गुर्दे की पथरी को नज़रअंदाज़ करने से गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं। दीर्घकालिक पीड़ा और असुविधा दैनिक जीवन और समग्र कल्याण पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता हैं।बड़ी या अनुपचारित गुर्दे की पथरी मूत्र पथ में बाधा डाल सकती हैं जिससे गुर्दे खराब हो सकती हैं या संक्रमण हो सकता हैं। उचित उपचार और जीवनशैली में बदलाव के बिना ये तकलीफें आम बन सकती हैं। गंभीर मामलों में मूत्र पथ में संक्रमण, सेप्सिस, या गुर्दे की विफलता जैसी जटिलताएँ भी हो सकती हैं।


निष्कर्ष :
भारत के युवा वर्ग में गुर्दे की पथरी एक बढ़ती चिंता का विषय हैं, जिसकी रोकथाम के लिए जागरूकता और सक्रिय उपायों की आवश्यकता हैं। गुर्दे की पथरी होने पर युवा वर्ग स्वस्थ जीवन शैली का चुनाव कर, हाइड्रेटेड रह कर, और समय पर चिकित्सा करवा कर गुर्दे की पथरी की पुनरावृत्ति को ना केवल प्रभावी ढंग से प्रबंधित कर सकते हैं बल्कि इसे रोक भी सकते हैं।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल :


1.क्या ज्यादा फास्ट फूड खाने से गुर्दे की पथरी का खतरा बढ़ जाता हैं?
अधिक नमक और अस्वास्थ्यकर वसा वाले फास्ट फूड मूत्र स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं जिसके कारण गुर्दे की पथरी का खतरा बढ़ सकता हैं।


2.गुर्दे की पथरी से बचने के लिए व्यक्ति को कितना मांस प्रोटीन के रूप में सेवन करना चाहिए?
गुर्दे की पथरी के खतरे को कम करने के लिए फलों और सब्जियों से परिपूर्ण आहार के साथ-साथ सिमित मात्रा में लीन मीट प्रोटीन का सेवन करें।


3.क्या RO के पानी के सेवन से किडनी में पथरी हो सकती हैं?
RO पानी में आवश्यक खनिजों की कमी होती हैं जिससे संभावित रूप से गुर्दे की पथरी का खतरा बढ़ जाता हैं। आहार या खनिज-संवर्धित पानी के सेवन के माध्यम से पर्याप्त खनिज सुनिश्चित करने की सलाह दी जाती हैं।


4.गुर्दे की पथरी से बचाव के लिए पानी का अनुशंसित TDS स्तर क्या हैं?
गुर्दे की पथरी को रोकने के लिए पानी का अनुकूल TDS स्तर आमतौर पर 150-300 ppm (पार्ट्स पर मिलियन) के बीच माना जाता हैं, जिससे पर्याप्त खनिज की मात्रा सुनिश्चित होती हैं।


5.RO पानी में खनिज कैसे मिलाया जा सकता हैं?
खनिज बूंदों या घोल का उपयोग करके, RO सिस्टम में खनिज कार्ट्रिज स्थापित करके, खनिज पत्थरों या फिल्टर स्थापित करके, इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव्स डाल कर, या RO पानी के साथ खनिज युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करके खनिजों को RO पानी में सम्मिलित किया जा सकता हैं।

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